APSirvaiya

Saturday, 23 September 2023

आरक्षण अधिकार या भीख

            अगर आप सही में किसी वर्ग विशेष के हितेसी है तो आपको ये बात भी ध्यान रखनी चाहिए की आपके द्वारा किसी पार्टी के समर्थन के कारण अपने ही वर्ग के लोगो के साथ अहित न किया जाए | जब बात हमारे हितों की आए हमारे समाज के उत्थान की आए तो अपने व्यक्तिगत लाभ या राजनैतिक लाभ को छोड़ कर समाज के उत्थान कैसे किया जाए इस बात पर ध्यान दे | जब कोई हितों की बात करे तो बस ये ध्यान में रखना चाहिए की क्या हम सही में इतना ही लाभ प्राप्त करने के अधिकारी है बस हम इतना ही अंश मिलना चाहिए, आज देश की एक बड़ी पार्टी द्वारा ओबीसी के समर्थन पर केवल वोट मांगे जा रहे हैं जिसका उद्देश्य मात्र यह है कि दूसरी पार्टी द्वारा अन्य वर्ग के विरुद्ध पिछड़ा वर्ग को खड़ा किया जा सके ताकि उनका वोट बैंक तैयार हो सके|

 


वहां सौ अधिकारी के ऊपर एक वरिष्ठ अधिकारी होता है क्या यह बात संभव है कि बिना किसी उच्च अधिकारी के आपको जो 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है उसमें चयनित किए गए ओबीसी के भाई बंधु कोई भी कार्य प्रणाली को क्रियान्वयन कर सकते हैं या फिर किसी भी प्रकार से अपने हितों का संरक्षण कर सकते हैं या अन्य भाई बंधु हैं उनका संरक्षण कर सकते हैं | जहा आपका चयन 50 प्रतिशत है वहां आप कुछ परिवर्तन कर सकते है , उन नीतियों में परिवर्तन जो आपके वर्ग को लाभ दे सके ताकि आपका समाज आगे बड़ सके ?

उत्तर है नहीं क्योंकि जिस चयन पद्धति में आरक्षण देने की बात की जा रही है वह केवल और केवल निम्न श्रेणी की पदों के लिए है जिसमें ना तो आपके पास कोई शक्ति होगी और ना ही आप किसी भी प्रकार से हमारे समाज को राजनीतिक, आर्थिक , सामाजिक शैक्षणिक लाभ प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वह आरक्षण मात्र सेवा के स्तर पर है जहा आपका काम बस उच्च अधिकारियों की सेवा करना होगा उनके आदेश को मनाना होगा |

यदि कोई पार्टी/समूह/दल/व्यक्ति अगर सच में पिछड़ा वर्ग का उत्थान करना चाहता है तो यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि आप किस श्रेणी में देश का उत्थान कर रहे हैं आपको किस जगह आरक्षण दिया जा रहा है आपको केवल और केवल निम्न पदों पर आरक्षण दिया जाएगा जहां पर हमेशा आप उच्च पदों में पहिले से बैठे लोगो द्वारा शोषित रहेंगे आपके लिए उपलब्धि प्राप्त करने की जो प्रायिकता है वह तब भी शून्य ही रहेगी क्योंकि किसी भी वर्ग विशेष द्वारा कोई भी पदोन्नति संस्थान में पहले से स्थापित वरिष्ठ जनों /सीनियर /उच्च पद वाले व्यक्ति द्वारा दी जाती है जिसमें हमारी भागीदारी ना के बराबर है तो आप यह कैसे सोच सकते हैं कि आपके वर्ग का उत्थान मात्र आपकी जनसंख्या के आधार पर आरक्षण मिलने से हो जाएगा क्या आप नहीं जानते की जो चयनित हुए व्यक्ति हैं उनका मुश्किल से मुश्किल 5 से 10 परसेंट ही उच्च श्रेणी के पदों में जाते हैं जिनकी नियुक्ति पहिले से स्थापित अधिकारियों द्वारा की जाएगी तो पहले से उच्च पदों पर स्थापित तो अगर आपको 50% रिजर्वेशन भी दे दिया गया तो क्या यह मुमकिन है की जो 10 परसेंट उच्च अधिकारी है वह खुदके वर्ण नहीं होंगे आप पर प्रशासन करने वाले समान नहीं होंगे जो पहिले थे | उनका चयन कौन करेगा वही लोग जो पहले से शासन में विराजित है जो चयन करते हैं कि कौन-कौन उच्च पदों पर जाएगा और कौन हमेशा निम्न पदों पर कार्यरत रहते हुए अपना जीवन व्यतित करेगा, कौन नीति निर्धारित करेगा और कौन नीति का पालन करेगा ,कौन सेवा करने का आदेश देगा और कौन सेवक रहेगा | मैं यह नहीं कहता कि आप किसकी बातों का अनुसरण कीजिए किसकी बातों का अनुसरण नहीं कीजिए किसी पार्टी/व्यक्ति /विशेष दल का मैं समर्थन नहीं करता परंतु यह बात भी सच है कि यह निर्धारण करने का अधिकार केवल और केवल आपका है कि आप किस प्रकार अपना हित चाहेंगे आपके हितों का निर्धारण करने वाला कोई और नहीं होता किसी और को यह अधिकार प्राप्त नहीं है |

 हम इतने भी निर्बल नहीं है कि कोई भी व्यक्ति हमें अपने अधिकार जितने देना चाहे उतना दे हम सशक्त हैं हमें जो अधिकार हमारे हैं हमें वह अधिकार चाहिए और उन्हें हम लेंगे ना कि इस आधार पर जो भीख में मिले सही लगे हमारा उच्च पदों पर भी आरक्षण बनता है ना कि निम्न पदों पर रहकर जिंदगी भर दासता और शोषित रहे |जीवन भर उच्च अधिकारियों की सेवा करना और जब बात पदोन्नति की आए तो हमारा साथ देने वाला ना कोई दाल हो ना कोई व्यक्ति हो ना कोई समाज हो |




अतः आपसे अनुरोध है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रस्ताव को मानने और न मानने के अलावा उस प्रस्ताव में अपना सुझाव अपना लाभ अपना अधिकार सुनिश्चित करें |जितना और जैसा मिले किसी के द्वारा दी गई भीख नहीं है आरक्षण हमारा अधिकार है |

Tuesday, 21 December 2021

Girl's marriage age in India

 Girl's marriage age should be 21 years, 16 years or 18 years??


Laws are restrictions for some time then they become beliefs.                                                                            -APSirvaiya 

You have to be fair before knowing the answer to this question. 




The latest National Family Health Survey (NFHS 5 2019–21) has brought out the dismal fact that Even 40 years after marriage age was raised from 16 to 18. We still have an alarming rate of child marriages at 23%.  In Year 1978 popularly known as the Sharda Act passed by government, extend the age of marriage for Girl's 18 year and for boy's 21 year.

Please do not compare the age of marriage with age of vote or work because they are extremely separate from each other. 

See The problem is not about the age of marriage of girl's it's all about the equality of girl's and boy's. Some people said that a person can elect a MLA, PM why not life partner at the age of 18. We have to ask them Is there only girl's who electing MLA, PM at age of 18?? Why boy's marriage age is 21 while they are electing MLA, PM at same age of 18. The sex discrimination is in our society mind

I don't know what is right, what is wrong but please answer my question How many 12th pass out student is matured enough to make there decision to choose a right person for become there life partner?? 

Why your sister, your mother should not house wife? They are getting married at 18 year age which is approx 12th pass out, how many jobs are available in present time for 12 pass out girl's students except to have children. 

Yes surely we get emotional in name of sister or mother, but we don't want this feeling for our wife's, sister in law, daughter in law. Because equality is not in our blood 

Why should not girl's marriage decrease to 16 year in present time? I think you got it why it sound like rubbish because at that time we are accepting, this is small age for getting married because previous time people just think that this is just for benifit of girl's health only to have children but now the time changed. Girls need equality not for health purposes only but also for opportunities, there dreams, there study, for maturity and mostly to have children at right age . And I think this is her basic rights


No matter how good you are, when society is born with wrong thinking, then your honesty is also useless. 

                                                              - APSirvaiya 



AMENDMENTS OF CERTAIN ENACTMENTS :-

THE PROHIBITION OF CHILD MARRIAGE (AMENDMENT) BILL, 2021

Short title and commencement

Amendment of section 1

Amendment of section 2

Amendment of section 3

Insertion of new section 14A. Act to have

overriding effect.


The Indian Christian Marriage Act, 1872

In section 60, for clause (1), the following clause shall be substituted, namely:—

(1) the age of the man and woman

intending to be married shall not be under

twenty-one years;


The Parsi Marriage and Divorce Act, 1936

(a) in section 3, in sub-section (1), in

 clause(c), for the words "female, has not

completed eighteen years of age", the words "female, has not completed twenty-one years of age" shall be substituted;

(b) in Schedule II, the expression "Signatures of the fathers or guardians of the contracting

parties under 21 years of age" shall be omitted.


The Special Marriage Act, 1954

 In section 4, in clause (c), for the words "eighteen years", the words "twenty-one years" shall be substituted.


The Hindu Marriage Act, 1955

 (a) in section 5, in clause (iii), for the words "eighteen years", the words "twenty-one years" shall be substituted;

(b) in section 13, in sub-section (2), in clause (iv), for the words "eighteen years", the words "twenty-one years" shall be substituted.


The Hindu Minority and Guardianship Act, 1956

 (i) in section 6,—

          (I) in clause (a), for the words “a boy or an unmarried girl”, the words “a legitimate boy or a legitimate girl” shall be substituted

          (II) in clause (b), for the words “an illegitimate boy or an illegitimate unmarried girl”, the words “an illegitimate boy or an illegitimate girl” shall be substituted;

          (III) clause (c) shall be omitted;

(ii) in section 9, sub-section (6) shall be

omitted.


The Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956

 In sections 7 and 8, for the words “not a minor”, the words “not below the age of twenty-one years” shall respectively be substituted.


The Foreign Marriage Act, 1969 

 In section 4, in clause (c), for the words "eighteen years", the words "twenty-one years" shall be substituted.


Saturday, 28 November 2020

किसान की समस्या का ज़िम्मेदार कौन

 मैं कोरोना को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो मुझे मेरे गाँव में रहने का मौका दिया |

जब में अपना मोबाइल छोड़ कर कभी पिता जी के साथ गाँव के रास्तें से होता खेत जाता हूँ, तो कई प्रश्न अनायास ही दिमाग में आ जाते हैं | जिसमें से सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भारत में कृषि करने में समस्या क्या है? 

भारत में कृषि जीवन का आधार है जब शहर की चकाचौंध लोगों को थका देती है | तब यही गाँव की मिट्टी सुकून की साँस देती है,भारत में गाँव और कृषि का महत्व आप भलीभांति समझते होगे | मैं साथ ही ये उम्मीद भी करता हूं कि आप उसकी हालत भी जानते होगे | आपने या किसी ने क्यों गाँव और कृषि छोड़ी, निश्चित ही छोड़ने के पीछे का समस्याएं ही कारण थीं | जिनके निवारण के लिए गाँव और किसानी को छोड़कर शहर भगाना पङा जैसे - शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति, आर्थिक और सामाजिक हालात, राजनैतिक अस्तित्व/वर्चस्व आदि |


पर इस सब के लिए जिम्मेदार कौन है? 

कौन जिम्मेदार है उन रुकती सांसो का जो फांसी पर लटक जाती है? बात जिम्मेदारी की है तो हम किसी को भी जिम्मेदार बना सकते हैं और खुद पल्ला झाड़ लेंगे। पर कहीं ना कहींं, किसी ना किसी तरह हम सब इसके लिए जिम्मेदार है। 

समाज में पल रही किसी भी अव्यवस्था, कुरीतियों, अन्याय या अपराध के लिए स्वयं समाज जिम्मेदार होता है, यह समाज में किसी एक की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज में प्रत्येक की जिम्मेदारी है |



 देश के अन्य हिस्सों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब में हो रहे किसान के किसान आंदोलन के बाद मुझे एक बात समझ आई मजदूर, किसान और गांव अपनी हालत के लिए खुद जिम्मेदार है | समय ने बहुत अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है | 

आप स्वयं अपने आसपास मूल्यांकन करें। हम सभी की आर्थिक, सामाजिक जिंदगी किसी न किसी प्रकार से किसानों से जुड़ी है | बेशक आपको लगता है आपको फर्क़ नहीं पड़ता आप कृषि से प्रत्यक्ष रूप से संबंध नहीं रखते, परंतु ये बात याद रखे कि आप और आपका जीवन केवल सामाजिक समरसता पर निर्भर करता है | इसके बावजूद भी हम में से कितनों ने इन किसान सुधारों का ठीक से अध्ययन किया हैै. किसान अनपढ़ और कम समझता है | अतः उसे आसानी से बहलाया फुसलाया जा सकता है, पर उसकी वह औलाद जो प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है, थोड़ा पढ़ लिख चुकी है, उसकी इन कानूनों पर क्या राय है ? 

उन्हें इस बारे में सिर्फ इतना पता है, जितना कि पार्टी के प्रवक्ता ने बोल दिया| मैं उन किसानों और किसान पुत्र-पुत्रियों से सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि वह पूरी जिंदगी सिर्फ शोषित होने के लिए बने हैं, फिर वह सरकार करें, , कोई कंपनी करें आपका बॉस करें या फिर समाज करें | 

जितनी समस्या पूर्ण आपका जीवन गया है, उससे कहीं ज्यादा आपकी आने वाली पीढ़ी का बीतेगा क्योंकि जो अपने हित-अहित की नहीं सोच सकता उसका शोषण होना निश्चित है |

If you want read about

New farm bill 2020 who is protesting & why?

Everything you need to know about the new farm laws

Agri Reform Bill:what will the new system


Wednesday, 14 October 2020

तनिष्क ज्वेलरी vs धर्म निरपेक्षता

 तनिष्क ज्वेलरी vs धर्म निरपेक्षता

तनिष्क ज्वेलरी वा धर्म निरपेक्षता के मामले को आप अपने-अपने दृष्टिकोण के हिसाब से देख सकते हैं | आपको अपने विचारों के अभिव्यक्ति का अधिकार है परन्तु आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जब आप धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं तो वह आपकी अपनी जिम्मेदारी और आपकी अपनी सोच होती है आप किस तरह धर्मनिरपेक्षता को देखते हैं | लोगों का नजरिया इस तरह की 1) सभी धर्म समान है 2)सभी धर्म को एक दूसरे की गरिमा को बनाए रखना चाहिए 3) सभी धर्म अलग -अलग अपना महत्व रखते हैं, 4) सभी धर्म को अपने-अपने धर्म को देखना चाहिए आपको दूसरे के धर्म का सम्मान या अपमान करने की कोई जरूरत नहीं |यहां जो चार दृष्टीकोण बताये है उसमें चार नंबर का जो दृष्टीकोण वो आज प्रभावी रूप से बढ़ाया जा रहा है |

जब कोई किसी और धर्म के द्वारा अपने धर्म के सम्मान को अपमान समझने लगे तो उसकी मानसिकता हीनता की ओर जाती है और देश खण्डित होने की ओर जाने लगता है | जहां लोग संविधान के पंथनिरपेक्ष को इतना बल केवल अपने स्वार्थ के लिए देते हैं वहां एक और शब्द है अखण्डता जिसपर भी ध्यान देना चाहिए | यदि केवल किसी एक धर्म के द्वारा दूसरे धर्म के सम्मान को इतना बुरा माना जाए, उस बात की विषय वस्तु को ना समझा जाए जिसको दर्शाया जा रहा है तो देश की अखंडता खतरे में |

तनिष्क की उस एकता और दूसरे के धर्म को सम्मान देने वाले विज्ञापन को अलग करने का कारण उसकी शर्मिंदगी या गलती महसूस करना नहीं बल्कि अपनी आर्थिक हानि के होने का भय है | यह टाटा ग्रुप को अच्छे से पता है यदि इस देश पंथनिरपेक्ष या धर्म की बात कर दीं जाए तो देश के लोग बुद्धी का प्रयोग या विज्ञापन के उद्देश्य को ना समझकर भावना में बह जाते हैं | टाटा समूह का डर ये भी था कि उनको ये मालूम था कि जब बात किसी धर्म पर आ जाए तो कोई भी सरकार या विपक्ष आपका उद्देश्य सही होने पर भी आपका साथ नहीं देगी क्युकी इससे उनको वोट की हानि होगी |

 एक और बात अगर गोर की जाए यहां लव जिहाद एक शब्द का प्रयोग किया जा रहा है, अगर इस विषय पर बात की जाए तो ये किसी भी व्यक्ति का मूल अधिकार है | जिससे उसको शादी करना वो कर सकता है स्वयंवर तो हमारे यहां प्राचीन काल से चलन में है | यहां पर एक बात यह भी है कि लड़कियों का शोषण तभी कर सकते हैं जब उनको लड़कों के समान किसी भी पंथ में शादी ना करने दिया जाए | लव जिहाद वो तरीका है जिसे लड़कियों को उनके अधिकार को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है | उन माँ बाप की तो बात ही क्या करे जो धर्म के खेल में आकर अपने ही बच्चों की बलि दे देते हैं उनकी खुशियो का गला दबा देते हैं |

कोई भी पंथ आपके धर्म से बढ़कर नहीं हो सकता बस आपको अपना धर्म ज्ञात हो | ये देश, आपका परिवार, अपनों का साथ किसी भी पंथ से बढ़कर है अपने पंथ के प्रति आस्था रखे उसका सम्मान करे सत्य का साथ दे अंधविश्वास से बचे देश की गरिमा और अखंडता बनाए रखे |

Tuesday, 13 October 2020

भारत में निर्वाचन (Election in India)

 निर्वाचन -

चुनावों की प्रक्रिया भारत में बहुत ही दुर्बल है कहीं ना कहीं एक दिन में इलेक्शन ना होने का कारण स्वयं सरकार का इलेक्शन को प्रभावित करने का है सरकार इलेक्शन एक दिन में नहीं चाहती क्युकी अगर एक दिन में सारे चुनाव हुए तो एक दिन में पूरे भारत में पैसे बाटना या मदिरा बाटना मुश्किल और लगभग नामुमकिन है | परन्तु सरकार के पास एक अपना अलग कारण ताकि जनता को मुर्ख बनाया जा सके और वो कारण यह है कि एक दिन में चुनाव मुमकिन नहीं है |


मेरा मानना है कि एक दिन में चुनाव मुमकिन है, करना नहीं चाहते बात अलग है | भारत में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों है,जो अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्रता रखते है | और चुनाव आयोग एक दिन में चुनाव करा सकता है | आज अगर चुनाव आयोग स्वतंत्र होता तो ये बात मुमकिन थी परन्तु आयोग सरकार की कठपुतली बनाकर रह गया है | सरकार भले किसी भी पक्ष की हो ये सबको ज्ञात है कि यदि चुनाव एक दिन में हुए तो वो चुनाव को हस्तक्षेप नहीं कर पायेगे | ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसे प्रतिनिधि सभा में चयनित करे जो चुनाव जीतने के लिए नहीं समाज सेवा के लिए प्रतिनिधि हो | एक ईमानदार प्रतिनिधि ही इस प्रकार का आपका मत सभा में प्रस्तुत कर सकता है |

निर्वाचन से सम्बन्धित एक और विचार रखना चाहूँगा भारत चुनाव आयोग ने सन् 2013 में नोटा (none of the above) मतदान प्रक्रिया में सम्मलित किया परन्तु इस सुविधा का कोई भी उपयोग नहीं है | ये भी केवल चुनाव को प्रभावित करता है | कारण यह है कि भारत निर्वाचन आयोग ने कोई सीमा निर्धारित नहीं की जिस प्रतिशत नोटा वोट होने पर चुनाव रद्द या दुबारा होगे फिर ये सोचना तो व्यर्थ है कि जिस प्रत्याशियों के चुनाव मे नोटा वोट ज़्यादा हुआ है वो दुबारा लड़ सकेंगे या नहीं | कुछ राज्य निर्वाचन आयोग ने इसपर कड़े कदम उठाए जिसमें महाराष्ट्र और हरियाणा निर्वाचन आयोग जिन्होंने कहा नोटा बहुमत होने पर चुनाव दुबारा होगे | परन्तु यही अगर केंद्र की बात की जाए तो एक पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि यह परिवर्तन हम नहीं कर सकते इसका अधिकार राज्य की विधान सभा के पास है | मेरा सवाल यह है कि यदि बिना किसी सुझाव के नोटा सूची मे आ सकता है, तो उसे शक्ति क्यूँ नहीं प्रदान की जा सकती है | 

निर्वाचन पर एक विषय-वस्तु यह भी है कि आयोग को स्वतंत्र चुनाव के साथ-साथ मत दाताओं पर भी ध्यान देना चाहिए | यदि कोई भी चुनाव केवल 60 % वोट पर होना है तो बहुमत तो उस संख्या का है जिसने वोट नहीं की परंतु विजेता 30% से ही जीत जाता है चुनाव आयोग को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि जब वो लोग जो रोज खाने के लिए रोज कमाते हैं वो अपना पैसा लगाकर चुनाव में मतदान करने क्यूँ आयेगे और ऊपर से उस दिन की कमाई का नुकसान अलग | भारत एक विकासशील देश हो सकता है परंतु केवल काग़ज़ों पर जहां की जनता को रोजगार ढूँढने से फुर्सत ना मिले वो देश के विकास और चुनाव के बारे में क्या सोचेगा |

मेरे विचार में मतदान बढ़ाने का एक उपाय यह हो सकता है कि जैसा मैंने ऊपर कहा एक दिन चुनाव संपूर्ण भारत में होते समय दो दिन के लिए यातायात मुफ्त हो जाएगा या यातायात भार कम कर दिया जाए | सवाल यह आता है यातायात मुफ्त करने के लिए पैसे कहा से आयेगे तो ये बात भी सभी को पता है कि भारत में चुनावो पर कितना खर्च किया जाता है जो कि केवल 60% मतदाताओं के लिए है थोड़ा और खर्च 40% के लिए भी कर सकते  है |

आपका मतदान आपके भविष्य को निर्धारित करता है, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से |


Election commission of India

Sunday, 11 October 2020

प्रेस की स्वतंत्रता का ह्रास

 

       सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय-

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कार्य सूचना, प्रसारण, प्रेस और फिल्मों से संबंधित है |और अन्य कार्यो में आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से लोगों के लिए समाचार सेवा, प्रेस को भारत सरकार की नीतियों से अवगत कराना और नीतियों के बारे में फीड-बैक लेना, भारत से संबंधित जानकारी को देश के बाहर और भीतर प्रकाशन के माध्यम से प्रसारित करना और बहुत से कार्य किए जाते है | यहां सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की यह जिम्मेदारी है कि वह भारत के समाचार पत्रों वा समाचार चैनल की स्वतंत्र बनाए रखे उन्हें सहयोग प्रदान करे | परन्तु ऐसा नहीं है, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय आज अपनी इच्छा के अनुसार जिस भी न्यूज एजेंसी को अपना प्रसारण कराना चाहती है उससे प्रसारण कराती है | जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है वा उस न्यूज एजेंसी पर | न्यूज एजेंसी को उपर्युक्त प्रसारण ना मिलने के कारण उन्हें सरकार की तरफ़ मजबूरन झुकना पड़ता है जिससे न्यूज एजेंसी की स्वतंत्रता का ह्रास होता है और जनता पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है | सरकार के इस प्रभाव के कारण न्यूज एजेंसी अपना सही प्रसारण नहीं कर पाती | इसके साथ-साथ जो न्यूज एजेंसी अपनी स्वतंत्रता बनाए रखती है, उनका आर्थिक लाभ का नुकसान होता है और साथ ही उनपर राजनीतिक दबाव भी बढ़ता है | ये बात भी आज सभी को पता है कि यदि न्यूज एजेंसी दबाव में होगी तो वो सही न्यूज नहीं दिखा पाएगी और इस तरह चौथा स्तम्भ जर्जर हो जाएगा उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ह्रास होगा |


मेरे विचार में सरकार (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) को किसी भी न्यूज एजेंसी पर अपने रिस्तेदार या जान पहचान के आधार पर नहीं बल्कि उस न्यूज एजेंसी की TRP के हिसाब से या प्रसारण के हिसाब से अपना प्रसारण देना चाहिए | ध्यान इस बात का भी रखना होगा कि TRP का सर्वेक्षण सही तरीके से हुआ हो |

समाचार एजेंसी हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण अंग है इसकी स्वतंत्रता को बनाए रखे |


सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार



Friday, 9 October 2020

जनता प्रतिनिधि में भेद भाव

 प्रतिनिधियों मे भेद भाव

यह बात आज किसी भी व्यक्ति से छुपी हुई नहीं है | जो भी सत्तारुढ़ पक्ष है वो अपने विरोधी दल वा उसके प्रतिनिधियों से भेद भाव करता है | यह गलत है उन प्रतिनिधियों के लिए और उससे ज़्यादा नुकसानदायक है, आम जनता के लिए, क्यूँकि प्रतिनिधि का केवल पैसे या सत्ता का नुकसान होगा परन्तु क्षेत्र या जनता के विकास का नुकसान होता है | यह भेद भाव केवल यही नहीं रुकता इसका और अधिक नुकसान तब होता है जब मुख्यमंत्री वा प्रधानमंत्री के निर्वाचन होते है | मुख्यमंत्री वा प्रधानमंत्री के चुनाव में जनता केवल इस भय के कारण की केन्द्र या राज्य में किसी और की सरकार होगी तो हमारे क्षेत्र में पैसा नहीं आएगा, विकास नहीं होगा | इस भय के रहते जनता उस अयोग्यता प्रतिनिधि को चुनने पर विवश हो जाती है, क्युकि भेद भाव के चलते योग्य प्रतिनिधि क्षेत्र का विकास नहीं कर सकता |

मेरा विचार है कि यदि प्रत्येक क्षेत्र को दी जाने वाली  विकास निधि या राशि पूर्व निश्चित कर एक समान कर दी जाए तो जनता के ऊपर जो अयोग्य प्रतिनिधि चुनने का दबाव है वो कम हो सकता है | हाँ में समझ सकता हू की कुछ लोगों का मानना है कि हर क्षेत्र को एक समान विकास की जरूरत नहीं है |तो सरकार यह कर सकती है कि जो ज्यादा पिछड़े क्षेत्र है उनका आंकलन कर उन क्षेत्रों को अधिक सहायता प्रदान करे और उन्हें भी अन्य क्षेत्रों के बराबर विकसित करे | और मेरे विचार में ऐसा कोई क्षेत्र अभी भारत में नहीं जिसे विकास के लिए सहायता की जरूरत ना हो | परन्तु आज भी ऐसे बहुत विपक्ष पार्टी के क्षेत्र है जहां पैसा इतना कम आता है कि उससे केवल अत्यंत महत्वपूर्ण विकास का कार्य ही हो पाता है |


अब जनता पर यह दायित्व आता है कि वह वास्तव में जो ईमानदार जुझारू और लग्नसार प्रतिनिधि है उनको ही चुने |यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश में विकास कहीं पीछे छूट जाएगा | सभी के योग्य प्रतिनिधि चुनने से हो सकता है क्षेत्र का विकास ना हो परंतु एक दिन ऐसा भी आएगा जब देश में एक अच्छी सरकार होने के कारण देश का विकास नहीं रुकेगा |

              धन्यवाद 🙏


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