निर्वाचन -
चुनावों की प्रक्रिया भारत में बहुत ही दुर्बल है कहीं ना कहीं एक दिन में इलेक्शन ना होने का कारण स्वयं सरकार का इलेक्शन को प्रभावित करने का है सरकार इलेक्शन एक दिन में नहीं चाहती क्युकी अगर एक दिन में सारे चुनाव हुए तो एक दिन में पूरे भारत में पैसे बाटना या मदिरा बाटना मुश्किल और लगभग नामुमकिन है | परन्तु सरकार के पास एक अपना अलग कारण ताकि जनता को मुर्ख बनाया जा सके और वो कारण यह है कि एक दिन में चुनाव मुमकिन नहीं है |
निर्वाचन से सम्बन्धित एक और विचार रखना चाहूँगा भारत चुनाव आयोग ने सन् 2013 में नोटा (none of the above) मतदान प्रक्रिया में सम्मलित किया परन्तु इस सुविधा का कोई भी उपयोग नहीं है | ये भी केवल चुनाव को प्रभावित करता है | कारण यह है कि भारत निर्वाचन आयोग ने कोई सीमा निर्धारित नहीं की जिस प्रतिशत नोटा वोट होने पर चुनाव रद्द या दुबारा होगे फिर ये सोचना तो व्यर्थ है कि जिस प्रत्याशियों के चुनाव मे नोटा वोट ज़्यादा हुआ है वो दुबारा लड़ सकेंगे या नहीं | कुछ राज्य निर्वाचन आयोग ने इसपर कड़े कदम उठाए जिसमें महाराष्ट्र और हरियाणा निर्वाचन आयोग जिन्होंने कहा नोटा बहुमत होने पर चुनाव दुबारा होगे | परन्तु यही अगर केंद्र की बात की जाए तो एक पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि यह परिवर्तन हम नहीं कर सकते इसका अधिकार राज्य की विधान सभा के पास है | मेरा सवाल यह है कि यदि बिना किसी सुझाव के नोटा सूची मे आ सकता है, तो उसे शक्ति क्यूँ नहीं प्रदान की जा सकती है |
निर्वाचन पर एक विषय-वस्तु यह भी है कि आयोग को स्वतंत्र चुनाव के साथ-साथ मत दाताओं पर भी ध्यान देना चाहिए | यदि कोई भी चुनाव केवल 60 % वोट पर होना है तो बहुमत तो उस संख्या का है जिसने वोट नहीं की परंतु विजेता 30% से ही जीत जाता है चुनाव आयोग को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि जब वो लोग जो रोज खाने के लिए रोज कमाते हैं वो अपना पैसा लगाकर चुनाव में मतदान करने क्यूँ आयेगे और ऊपर से उस दिन की कमाई का नुकसान अलग | भारत एक विकासशील देश हो सकता है परंतु केवल काग़ज़ों पर जहां की जनता को रोजगार ढूँढने से फुर्सत ना मिले वो देश के विकास और चुनाव के बारे में क्या सोचेगा |
मेरे विचार में मतदान बढ़ाने का एक उपाय यह हो सकता है कि जैसा मैंने ऊपर कहा एक दिन चुनाव संपूर्ण भारत में होते समय दो दिन के लिए यातायात मुफ्त हो जाएगा या यातायात भार कम कर दिया जाए | सवाल यह आता है यातायात मुफ्त करने के लिए पैसे कहा से आयेगे तो ये बात भी सभी को पता है कि भारत में चुनावो पर कितना खर्च किया जाता है जो कि केवल 60% मतदाताओं के लिए है थोड़ा और खर्च 40% के लिए भी कर सकते है |
आपका मतदान आपके भविष्य को निर्धारित करता है, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से |


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