प्रतिनिधियों मे भेद भाव
यह बात आज किसी भी व्यक्ति से छुपी हुई नहीं है | जो भी सत्तारुढ़ पक्ष है वो अपने विरोधी दल वा उसके प्रतिनिधियों से भेद भाव करता है | यह गलत है उन प्रतिनिधियों के लिए और उससे ज़्यादा नुकसानदायक है, आम जनता के लिए, क्यूँकि प्रतिनिधि का केवल पैसे या सत्ता का नुकसान होगा परन्तु क्षेत्र या जनता के विकास का नुकसान होता है | यह भेद भाव केवल यही नहीं रुकता इसका और अधिक नुकसान तब होता है जब मुख्यमंत्री वा प्रधानमंत्री के निर्वाचन होते है | मुख्यमंत्री वा प्रधानमंत्री के चुनाव में जनता केवल इस भय के कारण की केन्द्र या राज्य में किसी और की सरकार होगी तो हमारे क्षेत्र में पैसा नहीं आएगा, विकास नहीं होगा | इस भय के रहते जनता उस अयोग्यता प्रतिनिधि को चुनने पर विवश हो जाती है, क्युकि भेद भाव के चलते योग्य प्रतिनिधि क्षेत्र का विकास नहीं कर सकता |
मेरा विचार है कि यदि प्रत्येक क्षेत्र को दी जाने वाली विकास निधि या राशि पूर्व निश्चित कर एक समान कर दी जाए तो जनता के ऊपर जो अयोग्य प्रतिनिधि चुनने का दबाव है वो कम हो सकता है | हाँ में समझ सकता हू की कुछ लोगों का मानना है कि हर क्षेत्र को एक समान विकास की जरूरत नहीं है |तो सरकार यह कर सकती है कि जो ज्यादा पिछड़े क्षेत्र है उनका आंकलन कर उन क्षेत्रों को अधिक सहायता प्रदान करे और उन्हें भी अन्य क्षेत्रों के बराबर विकसित करे | और मेरे विचार में ऐसा कोई क्षेत्र अभी भारत में नहीं जिसे विकास के लिए सहायता की जरूरत ना हो | परन्तु आज भी ऐसे बहुत विपक्ष पार्टी के क्षेत्र है जहां पैसा इतना कम आता है कि उससे केवल अत्यंत महत्वपूर्ण विकास का कार्य ही हो पाता है |
अब जनता पर यह दायित्व आता है कि वह वास्तव में जो ईमानदार जुझारू और लग्नसार प्रतिनिधि है उनको ही चुने |यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश में विकास कहीं पीछे छूट जाएगा | सभी के योग्य प्रतिनिधि चुनने से हो सकता है क्षेत्र का विकास ना हो परंतु एक दिन ऐसा भी आएगा जब देश में एक अच्छी सरकार होने के कारण देश का विकास नहीं रुकेगा |
धन्यवाद 🙏

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