APSirvaiya: धर्म

Wednesday, 7 October 2020

धर्म



  धर्म की परिभाषा 

धर्म का अर्थ होता है, धारण, यानी जिसे धारण किया जा सके. गुणों को जो प्रदर्शित करे वह धर्म है| धर्म एक संस्कृत भाषा का शब्द है जो धारण करने वाले धृ धातू से बना है |

“धार्यते इति धर्म:” इसका मतलब है जो धारण करते है वहीं धर्म कहलाता है|

मनुष्य के जीवन को अच्छा व पवित्र बनाने वाली जो शुद्ध सार्वजनिक मर्यादा पद्धति हैं. जिसे धर्म कहा गया है |

वैदिक साहित्य भारतीय संस्कृति के प्राचीनतम स्वरूप पर प्रकाश डालने वाला विश्व का प्राचीनतम् साहित्य है, वैदिक साहित्य में धर्म वस्तु के स्वाभाविक गुणों और कर्तव्यों के अर्थो में भी आया हैं | जैसे जलाना और प्रकाश देना अग्नि का धर्म हैं, मनुष्य का धर्म कर्तव्य का पालन है, और प्रजा का पालन और रक्षा करना राजा का धर्म होता हैं |


                        मनु स्मृति

धृति: क्षमा दमोअस्तेयं शोचं इन्द्रिय निग्रह:

धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्म लक्षणं

अर्थ - धैर्य , क्षमा , संयम , चोरी न करना , स्वच्छता , इन्द्रियों को वश मे रखना , बुद्धि , विद्या , सत्य और क्रोध न करना, ये दस धर्म के लक्षण हैं ।


                     नवीन धर्म 

आज का धर्म अंशतः दूषित हो गया है, इसका मुख्य कारण कुछ लोगों के द्वारा धर्म का दूषण कर अपने लाभ के लिए प्रयोग और धर्म अनुयायी लोगों का धर्म के विषय में जानकारी ना होना और धर्मान्धता है | आज धर्म को इस हद तक दूषित किया जा चुका है कि लोगों को धर्म के नाम पर किसी व्यक्ति या अन्य समाज के विरुद्ध अपराध तक करने के लिए प्रेरित कर दिया जाता है | हमारा धर्म इस बात को ना नहीं कहता परन्तु धर्मान्धता के चलते लोग धर्म का काम समझ कर पाप करते जाते हैं | हमारे धर्म में यहां तक कहा गया है कि दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है |

तुलसीदास जी -

 ‘परहित सरिस धर्म नहि भाई परपीड़ा सम नहि अधमाई’: परहित के समान कोई दूसरा धर्म नहीं है । इसलिए सबको दूसरों की मदद करना चाहिए, यह सबसे बड़ा मानव धर्म है |

दूसरों को पीड़ा देने के समान कोई दूसरा अधर्म नहीं है । संत किसी भी स्थिति और परिस्थित में भी अधर्म करने को नहीं कहते । कभी भी अधर्म करने को नहीं कह सकते । इसलिए संतो के उपदेश और ग्रन्थ को सूझ-बूझ के साथ सुनना और पढ़ना चाहिए ।

परन्तु आज धर्म के माध्यम से निर्बलों और कमजोरों का शोषण किया जा रहा है | कुछ धर्म प्रथा इतनी हीन भावना के साथ बनाई गई जिनका प्रयोग शोषण के लिए किया गया |


                              सती 

प्राचीन काल में जब किसी स्त्री के पति का निधन हो जाता था तब अपने सम्पत्ति के बटवारे को रोकने के लिए स्त्री को यह कहकर की सती माता ने आत्मदाह किया था | हिन्दू विधवा अपने पति की लाश के साथ उसका अपने शरीर को भी जीवित होने पर जलाया जाता था ,अतः उसकी आत्महत्या करायी गयी | हिन्दू धर्म से तात्पर्य हिन्दू धर्म के अनुयायियों द्वारा आयोजित प्रथाओं तथा विश्वासों से है। जो बिना सोचे समझे किसी भी दूषित धर्म बात पर विश्वास कर पाप के भागी बनते थे | हमारे घर में निसंदेह सती माता का वर्णन है परन्तु माता सती ने आत्मदाह पति (भगवान शंकर) के जिवित रहते ' हवन कुंड ' में 'पति(भगवान शंकर) के अपमान' को सहन ना करने के कारण किया था | ना कि 'पति के अर्थी' पर 'पति के निधन के पश्चात' |



रामायण जो एक अन्य महान ग्रंथ है हिन्दू संस्कृति का, उसमे भी श्री राम के पिता श्री दशरथ के निधन के पश्चात उनकी पत्नी मे से किसी ने भी आत्मदाह नहीं किया | परन्तु अंधविश्वास के चलते समाज में जमीन, जायदाद बटवारे से बचने के लिए कुरीतियों को चलाकर महिलाओं का शोषण किया गया |


                       पशु बलि प्रथा-

 देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बलि का प्रयोग किया जाता है। बलि प्रथा के अंतर्गत बकरा, मुर्गा या भैंसे की बलि दिए जाने का प्रचलन है। सवाल यह उठता है कि क्या बलि प्रथा हिन्दू धर्म का हिस्सा है?

बलि प्रथा का प्राचलन हिंदुओं के शाक्त और तांत्रिकों के संप्रदाय में ही देखने को मिलता है लेकिन इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है। बहुत से समाजों में लड़के के जन्म होने या उसकी मान उतारने के नाम पर बलि दी जाती है तो कुछ समाज में विवाह आदि समारोह में बलि दी जाती है जो कि अनुचित मानी गई है। वेदों में किसी भी प्रकार की बलि प्रथा कि इजाजत नहीं दी गई है।  




                   जादू-टोना, तंत्र-मंत्र 

जादू टोना या मंत्र-तंत्र द्वारा अपने स्वार्थ सिद्ध करना या दूसरों को नुकसान पहुंचाना हिन्दू धर्म का अंग है? शैव, शाक्त और तांत्रिकों के संप्रदाय में इस तरह का प्रचलन बहुत है। आजकल ज्योतिष भी तांत्रिक टोटके और उपाय बताने लगे हैं।

ग्रह-नक्षत्र पूजा, वशीकरण, सम्मोहन, मारण, ताबीज, स्तंभन, काला जादू आदि सभी का वैदिक मत अनुसार निषेध है। ये सभी तरह की विद्याएं स्थानीय परंपरा का हिंसा हैं। हालांकि अथर्ववेद में इस तरह की विद्या को यह कहकर दर्शाया गया है कि ऐसी विद्याएं भी समाज में प्रचलित हैं, जो कि वेद विरुद्ध हैं। अथर्ववेद का लक्ष्य है लोगों को सेहतमंद बनाए रखना, जीवन को सरल बनाना और ब्रह्मांड के रहस्य से अवगत कराना।


टोने-टोटके से व्यक्ति और समाज का अहित ही होता है और सामाजिक एकता टूटती है। ऐसे कर्म करने वाले लोगों को जाहिल समाज का माना जाता है। अथर्ववेद में बताया गया है कि जिस घर में मूर्खों की पूजा नहीं होती है, जहां विद्वान लोगों का अपमान नहीं होता है बल्कि विद्वान और संत लोगों का उचित मान-सम्मान किया जाता है, वहां समृद्धि और शांति होती है। कर्मप्रथान सफल जीवन जीने की सीख देता है अथर्ववेद।

                         छुआछूत 

अक्सर जातिवाद, छुआछूत और सवर्ण, दलित वर्ग के मुद्दे को लेकर धर्मशास्त्रों को भी दोषी ठहराया जाता है, लेकिन यह बिलकुल ही असत्य है। इस मुद्दे पर धर्म शास्त्रों में क्या लिखा है यह जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस मुद्दे को लेकर हिन्दू सनातन धर्म को बहुत बदनाम किया गया है और किया जा रहा है।दलितों को 'दलित' नाम हिन्दू धर्म ने नहीं दिया, इससे पहले 'हरिजन' नाम भी हिन्दू धर्म के किसी शास्त्र ने नहीं दिया। इसी तरह इससे पूर्व के जो भी नाम थे वे हिन्दू धर्म ने नहीं दिए। 


आज जो नाम दिए गए हैं वे पिछले 60 वर्ष की राजनीति की उपज हैं और इससे पहले जो नाम दिए गए थे वे पिछले 900 सालों की गुलामी की उपज हैं।बहुत से ऐसे ब्राह्मण हैं, जो आज दलित हैं, मुसलमान हैं, ईसाई हैं या अब वे बौद्ध हैं। बहुत से ऐसे दलित हैं, जो आज ब्राह्मण समाज का हिस्सा हैं। यहां ऊंची जाति के लोगों को 'सवर्ण' कहा जाने लगा है। यह 'सवर्ण' नाम भी हिन्दू धर्म ने नहीं दिया।


                      पारंपरिक अंधविश्वास

  ऐसे बहुत से अंधविश्वास हैं, जो लोक परंपरा से आते हैं जिनके पीछे कोई ठोस आधार नहीं होता। ये शोध का विषय भी हो सकते हैं। इसमें से बहुत-सी ऐसी बातें हैं, जो धर्म का हिस्सा हैं और बहुत-सी बातें नहीं हैं। हालांकि इनमें से कुछ के जवाब हमारे पास नहीं है।

जैसे-

क्या किसी की छींक को अपने कार्य के लिए अशुभ मानते हैं?


 घर से बाहर निकलते वक्त अपना दायां पैर ही पहले क्यों बाहर निकालते हैं?

जूते-चप्पल उल्टे हो जाए तो आप मानते हैं कि किसी से लड़ाई-झगड़ा हो सकता है?

 आप बिल्ली के रास्ता काटने पर क्यों रुक जाते हैं?

जाते समय अगर कोई पीछे से टोक दे तो आप क्यों चिढ़ जाते हैं?

किसी दिन विशेष को बाल कटवाने या दाढ़ी बनवाने से परहेज क्यों करते हैं?

 क्या आपको लगता है कि घर या अपने अनुष्ठान के बाहर नींबू-मिर्च लगाने से बुरी नजर से बचाव होगा?

 कोई छींक दे तो आप अपना जाना रोक क्यों देते हैं?

रात में किसी पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोते?

रात में बैंगन, दही और खट्टे पदार्थ क्यों नहीं खाते?

 रात में झाडू क्यों नहीं लगाते और झाड़ू को खड़ा क्यों नहीं रखते?

अंजुली से या खड़े होकर जल नहीं पीना चाहिए।

क्या बांस जलाने से वंश नष्ट होता है।

ऊपर दिए गए उदाहरणों मे बहुत से तथ्य किसी ना किसी वैज्ञानिक आधार पर उपर्युक्त है, परन्तु ऐसे बहुत अंधविश्वास है जो बिना किसी आधार के समाज के प्रचलन में हैं |


                     ईश्वर एक या अनेक 

वेद एकेश्वरवाद की घोषणा करते हैं, इसके हजारों उदाहरण हैं लेकिन हिन्दू समाज एक ईश्वर की प्रार्थना को छोड़कर तरह-तरह के देवी-देवताओं की पूजा करता है, क्यों यह उचित है? यह एक बहस का विषय है।

वैदिक काल में लोग ब्रह्म (ईश्‍वर) की प्रार्थना करते थे। फिर लोग पंच तत्वों की प्रार्थना करने लगे। फिर इंद्र, वरुण, आदित्य, अश्‍विन कुमार आदि वैदिक देवताओं को छोड़कर लोग ब्रह्मा, विष्णु और शिव की पूजा करने लगे।फिर लोगों ने राम और कृष्ण के मंदिर बनाए तो विष्णु और ब्रह्मा की पूजा-प्रार्थना कम होने लगी। कई लोगों ने चालीसाएं लिखीं और धर्म में एक नए प्रचलन की शुरुआत की।

अब आज के युग में लोग इतने भयभीत रहने लगे हैं कि हनुमान और शनि भगवान के मंदिरों की संख्या बढ़ गई है। किसी भी देवी-देवता और गुरु की पूजा करने का यहां विरोध नहीं, लेकिन सिर्फ एक सवाल है कि क्या सैकड़ों देवताओं की पूजा करना या करवाना वेदसम्मत है? या यह भी लोगों को एक अंधविश्वासी बनाने का तरीका है? या लोग आज भी अपने-अपने भगवानों को महत्व देने के लिए कुछ भी करेगे? 


अंत में बस इतना कहना चाहूँगा कि किसी भी धर्म में आस्था विश्वास करना गलत नहीं किसी ईश्वर की आराधना गलत नहीं पर उसी धर्म - ईश्वर को आधार बनाकर पाप करना अन्याय करना किसी व्यक्ति वर्ण समुदाय का शोषण करना अधर्म और अन्याय है |कोई भी धर्म वेद उपनिषद किसी भी कुरीतियों, अन्याय, हिंसा, शोषण या अंधविश्वास को नहीं बढ़ाता | अपनी विवेक शक्ति का प्रयोग कर सामाजिक बुराईयों से बचे और उन्हें खत्म करने का प्रयास करे |


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