APSirvaiya: प्रेस की स्वतंत्रता का ह्रास

Sunday, 11 October 2020

प्रेस की स्वतंत्रता का ह्रास

 

       सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय-

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कार्य सूचना, प्रसारण, प्रेस और फिल्मों से संबंधित है |और अन्य कार्यो में आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से लोगों के लिए समाचार सेवा, प्रेस को भारत सरकार की नीतियों से अवगत कराना और नीतियों के बारे में फीड-बैक लेना, भारत से संबंधित जानकारी को देश के बाहर और भीतर प्रकाशन के माध्यम से प्रसारित करना और बहुत से कार्य किए जाते है | यहां सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की यह जिम्मेदारी है कि वह भारत के समाचार पत्रों वा समाचार चैनल की स्वतंत्र बनाए रखे उन्हें सहयोग प्रदान करे | परन्तु ऐसा नहीं है, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय आज अपनी इच्छा के अनुसार जिस भी न्यूज एजेंसी को अपना प्रसारण कराना चाहती है उससे प्रसारण कराती है | जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है वा उस न्यूज एजेंसी पर | न्यूज एजेंसी को उपर्युक्त प्रसारण ना मिलने के कारण उन्हें सरकार की तरफ़ मजबूरन झुकना पड़ता है जिससे न्यूज एजेंसी की स्वतंत्रता का ह्रास होता है और जनता पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है | सरकार के इस प्रभाव के कारण न्यूज एजेंसी अपना सही प्रसारण नहीं कर पाती | इसके साथ-साथ जो न्यूज एजेंसी अपनी स्वतंत्रता बनाए रखती है, उनका आर्थिक लाभ का नुकसान होता है और साथ ही उनपर राजनीतिक दबाव भी बढ़ता है | ये बात भी आज सभी को पता है कि यदि न्यूज एजेंसी दबाव में होगी तो वो सही न्यूज नहीं दिखा पाएगी और इस तरह चौथा स्तम्भ जर्जर हो जाएगा उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ह्रास होगा |


मेरे विचार में सरकार (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) को किसी भी न्यूज एजेंसी पर अपने रिस्तेदार या जान पहचान के आधार पर नहीं बल्कि उस न्यूज एजेंसी की TRP के हिसाब से या प्रसारण के हिसाब से अपना प्रसारण देना चाहिए | ध्यान इस बात का भी रखना होगा कि TRP का सर्वेक्षण सही तरीके से हुआ हो |

समाचार एजेंसी हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण अंग है इसकी स्वतंत्रता को बनाए रखे |


सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार



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