मैं कोरोना को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो मुझे मेरे गाँव में रहने का मौका दिया |
जब में अपना मोबाइल छोड़ कर कभी पिता जी के साथ गाँव के रास्तें से होता खेत जाता हूँ, तो कई प्रश्न अनायास ही दिमाग में आ जाते हैं | जिसमें से सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भारत में कृषि करने में समस्या क्या है?
भारत में कृषि जीवन का आधार है जब शहर की चकाचौंध लोगों को थका देती है | तब यही गाँव की मिट्टी सुकून की साँस देती है,भारत में गाँव और कृषि का महत्व आप भलीभांति समझते होगे | मैं साथ ही ये उम्मीद भी करता हूं कि आप उसकी हालत भी जानते होगे | आपने या किसी ने क्यों गाँव और कृषि छोड़ी, निश्चित ही छोड़ने के पीछे का समस्याएं ही कारण थीं | जिनके निवारण के लिए गाँव और किसानी को छोड़कर शहर भगाना पङा जैसे - शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति, आर्थिक और सामाजिक हालात, राजनैतिक अस्तित्व/वर्चस्व आदि |
पर इस सब के लिए जिम्मेदार कौन है?
कौन जिम्मेदार है उन रुकती सांसो का जो फांसी पर लटक जाती है? बात जिम्मेदारी की है तो हम किसी को भी जिम्मेदार बना सकते हैं और खुद पल्ला झाड़ लेंगे। पर कहीं ना कहींं, किसी ना किसी तरह हम सब इसके लिए जिम्मेदार है।
समाज में पल रही किसी भी अव्यवस्था, कुरीतियों, अन्याय या अपराध के लिए स्वयं समाज जिम्मेदार होता है, यह समाज में किसी एक की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज में प्रत्येक की जिम्मेदारी है |
देश के अन्य हिस्सों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब में हो रहे किसान के किसान आंदोलन के बाद मुझे एक बात समझ आई मजदूर, किसान और गांव अपनी हालत के लिए खुद जिम्मेदार है | समय ने बहुत अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है |
आप स्वयं अपने आसपास मूल्यांकन करें। हम सभी की आर्थिक, सामाजिक जिंदगी किसी न किसी प्रकार से किसानों से जुड़ी है | बेशक आपको लगता है आपको फर्क़ नहीं पड़ता आप कृषि से प्रत्यक्ष रूप से संबंध नहीं रखते, परंतु ये बात याद रखे कि आप और आपका जीवन केवल सामाजिक समरसता पर निर्भर करता है | इसके बावजूद भी हम में से कितनों ने इन किसान सुधारों का ठीक से अध्ययन किया हैै. किसान अनपढ़ और कम समझता है | अतः उसे आसानी से बहलाया फुसलाया जा सकता है, पर उसकी वह औलाद जो प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है, थोड़ा पढ़ लिख चुकी है, उसकी इन कानूनों पर क्या राय है ?
उन्हें इस बारे में सिर्फ इतना पता है, जितना कि पार्टी के प्रवक्ता ने बोल दिया| मैं उन किसानों और किसान पुत्र-पुत्रियों से सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि वह पूरी जिंदगी सिर्फ शोषित होने के लिए बने हैं, फिर वह सरकार करें, , कोई कंपनी करें आपका बॉस करें या फिर समाज करें |
जितनी समस्या पूर्ण आपका जीवन गया है, उससे कहीं ज्यादा आपकी आने वाली पीढ़ी का बीतेगा क्योंकि जो अपने हित-अहित की नहीं सोच सकता उसका शोषण होना निश्चित है |
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