अगर आप सही में किसी वर्ग विशेष के हितेसी है तो आपको ये बात भी ध्यान रखनी चाहिए की आपके द्वारा किसी पार्टी के समर्थन के कारण अपने ही वर्ग के लोगो के साथ अहित न किया जाए | जब बात हमारे हितों की आए हमारे समाज के उत्थान की आए तो अपने व्यक्तिगत लाभ या राजनैतिक लाभ को छोड़ कर समाज के उत्थान कैसे किया जाए इस बात पर ध्यान दे | जब कोई हितों की बात करे तो बस ये ध्यान में रखना चाहिए की क्या हम सही में इतना ही लाभ प्राप्त करने के अधिकारी है बस हम इतना ही अंश मिलना चाहिए, आज देश की एक बड़ी पार्टी द्वारा ओबीसी के समर्थन पर केवल वोट मांगे जा रहे हैं जिसका उद्देश्य मात्र यह है कि दूसरी पार्टी द्वारा अन्य वर्ग के विरुद्ध पिछड़ा वर्ग को खड़ा किया जा सके ताकि उनका वोट बैंक तैयार हो सके|
वहां सौ अधिकारी के ऊपर एक वरिष्ठ अधिकारी होता है क्या यह बात संभव है कि बिना किसी उच्च अधिकारी के आपको जो 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है उसमें चयनित किए गए ओबीसी के भाई बंधु कोई भी कार्य प्रणाली को क्रियान्वयन कर सकते हैं या फिर किसी भी प्रकार से अपने हितों का संरक्षण कर सकते हैं या अन्य भाई बंधु हैं उनका संरक्षण कर सकते हैं | जहा आपका चयन 50 प्रतिशत है वहां आप कुछ परिवर्तन कर सकते है , उन नीतियों में परिवर्तन जो आपके वर्ग को लाभ दे सके ताकि आपका समाज आगे बड़ सके ?
उत्तर है नहीं क्योंकि जिस चयन पद्धति में आरक्षण देने की बात की जा रही है वह केवल और केवल निम्न श्रेणी की पदों के लिए है जिसमें ना तो आपके पास कोई शक्ति होगी और ना ही आप किसी भी प्रकार से हमारे समाज को राजनीतिक, आर्थिक , सामाजिक शैक्षणिक लाभ प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वह आरक्षण मात्र सेवा के स्तर पर है जहा आपका काम बस उच्च अधिकारियों की सेवा करना होगा उनके आदेश को मनाना होगा |
यदि कोई पार्टी/समूह/दल/व्यक्ति अगर सच में पिछड़ा वर्ग का उत्थान करना चाहता है तो यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि आप किस श्रेणी में देश का उत्थान कर रहे हैं आपको किस जगह आरक्षण दिया जा रहा है आपको केवल और केवल निम्न पदों पर आरक्षण दिया जाएगा जहां पर हमेशा आप उच्च पदों में पहिले से बैठे लोगो द्वारा शोषित रहेंगे आपके लिए उपलब्धि प्राप्त करने की जो प्रायिकता है वह तब भी शून्य ही रहेगी क्योंकि किसी भी वर्ग विशेष द्वारा कोई भी पदोन्नति संस्थान में पहले से स्थापित वरिष्ठ जनों /सीनियर /उच्च पद वाले व्यक्ति द्वारा दी जाती है जिसमें हमारी भागीदारी ना के बराबर है तो आप यह कैसे सोच सकते हैं कि आपके वर्ग का उत्थान मात्र आपकी जनसंख्या के आधार पर आरक्षण मिलने से हो जाएगा क्या आप नहीं जानते की जो चयनित हुए व्यक्ति हैं उनका मुश्किल से मुश्किल 5 से 10 परसेंट ही उच्च श्रेणी के पदों में जाते हैं जिनकी नियुक्ति पहिले से स्थापित अधिकारियों द्वारा की जाएगी तो पहले से उच्च पदों पर स्थापित तो अगर आपको 50% रिजर्वेशन भी दे दिया गया तो क्या यह मुमकिन है की जो 10 परसेंट उच्च अधिकारी है वह खुदके वर्ण नहीं होंगे आप पर प्रशासन करने वाले समान नहीं होंगे जो पहिले थे | उनका चयन कौन करेगा वही लोग जो पहले से शासन में विराजित है जो चयन करते हैं कि कौन-कौन उच्च पदों पर जाएगा और कौन हमेशा निम्न पदों पर कार्यरत रहते हुए अपना जीवन व्यतित करेगा, कौन नीति निर्धारित करेगा और कौन नीति का पालन करेगा ,कौन सेवा करने का आदेश देगा और कौन सेवक रहेगा | मैं यह नहीं कहता कि आप किसकी बातों का अनुसरण कीजिए किसकी बातों का अनुसरण नहीं कीजिए किसी पार्टी/व्यक्ति /विशेष दल का मैं समर्थन नहीं करता परंतु यह बात भी सच है कि यह निर्धारण करने का अधिकार केवल और केवल आपका है कि आप किस प्रकार अपना हित चाहेंगे आपके हितों का निर्धारण करने वाला कोई और नहीं होता किसी और को यह अधिकार प्राप्त नहीं है |
हम इतने भी निर्बल नहीं है कि कोई भी व्यक्ति हमें अपने अधिकार जितने देना चाहे उतना दे हम सशक्त हैं हमें जो अधिकार हमारे हैं हमें वह अधिकार चाहिए और उन्हें हम लेंगे ना कि इस आधार पर जो भीख में मिले सही लगे हमारा उच्च पदों पर भी आरक्षण बनता है ना कि निम्न पदों पर रहकर जिंदगी भर दासता और शोषित रहे |जीवन भर उच्च अधिकारियों की सेवा करना और जब बात पदोन्नति की आए तो हमारा साथ देने वाला ना कोई दाल हो ना कोई व्यक्ति हो ना कोई समाज हो |
अतः आपसे अनुरोध है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रस्ताव को मानने और न मानने के अलावा उस प्रस्ताव में अपना सुझाव अपना लाभ अपना अधिकार सुनिश्चित करें |जितना और जैसा मिले किसी के द्वारा दी गई भीख नहीं है आरक्षण हमारा अधिकार है |


No comments:
Post a Comment
Share your view